एक शहर में एक आदमी रहता था। वह बहुत ही लालची था। उसने सुन रखा था कि अगर संतों और साधुओं की सेवा की जाए तो बहुत अधिक धन प्राप्त होता है। यह सोचकर उसने साधु-संतों की सेवा करनी प्रारम्भ कर दी। एक बार उसके घर एक बड़े ही चमत्कारी संत आए। उन्होंने उसकी सेवा से प्रसन्न होकर उसे चार दीये दिए और कहा, “इनमें से एक दीया जला लेना और पूर्व दिशा की ओर चले जाना। जहाँ यह दीया बुझ जाए, वहाँ की जमीन को खोद लेना, वहाँ तुम्हें काफी धन मिल जाएगा। अगर फिर तुम्हें धन की आवश्यकता पड़े तो दूसरा दीया जला लेना और पश्चिम दिशा की ओर चले जाना। जहाँ यह दीया बुझ जाए, वहाँ की जमीन खोद लेना, तुम्हें मनचाही माया मिलेगी। फिर भी संतुष्टि न हो तो तीसरा दीया जला लेना और दक्षिण दिशा की ओर चले जाना। उसी प्रकार दीया बुझने पर जब तुम वहाँ की जमीन खोदोगे तो तुम्हें बेअंत धन मिलेगा। तब तुम्हारे पास केवल एक दीया बच जाएगा और एक ही दिशा रह जाएगी। तुमने यह दीया न ही जलाना है और न ही इसे उत्तर दिशा की ओर ले जाना है। ” यह कहकर संत चले गए। लालची आदमी ने उसी समय पहला दीया जलाया और पूर्व दिशा की ओर चल पड़ा। दूर जंगल में जाकर दीया बुझ गया।
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 36 • कथा ohtU7XbIyC335FHDEdsJ
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