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पौराणिक कथाएँ 7
पौराणिक कथाएँ 7
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 7 • कथा AdUbxRc1439joCLkWyna
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एक दिन की बात है कि श्रीरामचंद्रजी और सीताजी बैठे हुए थे, आपस में बाते हो रही थी। हनुमानजी की चर्चा छिड़ी तो श्रीरामजी ने कहा - हनुमान मेरा बड़ा भक्त है। सीताजी बोली- अरे वाह ! आपने यह कैसे जाना ? "वह तो मेरा भक्त है… श्रीरामजी कहा - तुम्हे अभी क्या मालूम, मुझसे बढ़कर वह किसी को नही मानता… सीताजी मुस्काई और बोली - आप धोखे में है, वह जितना मुझे मानता है उतना किसी को नही… श्रीरामजी बोले - तो इसमें झगड़ने की कौन सी बात है ? उसी से पूछ लिया जाये. सीताजी ने कहा- आज जब वे आयेंगे तब मैं एक चीज माँगूँगी, उसी समय आप भी कोई चीज माँग मांगियेगा । जिसकी चीज पहले आ जाये उसकी ही जीत हो जायेगा। श्रीरामजी ने कहा- पक्की रही… कुछ समय पश्चात हनुमानजी भी वहाँ पहुँच गये, श्रीरामजी और माता जानकी ने प्रसन्न्ता से उनका स्वागत किया। हनुमानजी एक हाथ से श्रीरामजी और दूसरे से सीताजी के पैर दबाने लगे, सीताजी श्रीरामजी की और देखकर इशारा किया। भगवान बोले- हनुमान !

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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