कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 7 • कथा Qs4umOfcYgvSjCjAuk1j
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अयोध्या की सुप्रसिद्ध 'मणिरामदास की छावनी' का इतिहास बड़ा ही दिव्य है। स्वामी मणिरामदास जी महाराज एक उच्च कोटि के तपस्वी थे। उनके जीवन की यह कथा सिद्ध करती है कि भक्त के प्रेम के आगे भगवान को भी झुकना पड़ता है। महाराज जी ने चित्रकूट के घने जंगलों में लगातार 12 वर्षों तक हनुमान जी की कठोर साधना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर पवनपुत्र हनुमान जी प्रत्यक्ष प्रकट हुए। हनुमान जी ने उन्हें एक दिव्य मणि भेंट करनी चाही, जो संसार के समस्त ऐश्वर्य दे सकती थी। किंतु महाराज जी ने बड़ी विनम्रता से उसे अस्वीकार कर दिया और कहा: "प्रभु, मुझे इस पत्थर की मणि की आवश्यकता नहीं है। यदि आप देना ही चाहते हैं, तो स्वयं मेरे साथ चलिए।
