कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 41 • कथा A9XmsSqTNZJ8F4HdnbCN
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कामद सम्प्रदाय जिसे कामदगिरि या चित्रकूट की परंपराओं से भी जोड़कर देखा जाता है मुख्य रूप से 'कामद' यानी कामनाओं को पूर्ण करने वाले प्रभु के 'शरणागति' भाव पर आधारित है। इस सम्प्रदाय की कथाओं में श्री कृष्ण के उस रूप का वर्णन मिलता है जहाँ वे भक्त की इच्छा (काम) पूरी करने के लिए मर्यादाएं तक भूल जाते हैं। यह कथा एक वृद्ध भक्त की है जो कामदगिरि के समीप रहता था और श्री कृष्ण के 'मदन मोहन' रूप का अनन्य उपासक था। वृद्ध भक्त बहुत गरीब था, लेकिन उसकी एक ही 'काम' (इच्छा) थी—ठाकुर जी को अपने हाथ से बनी 'मोतीचूर के लड्डू' का भोग लगाना।
