एक समय की बात है, एक प्रतापी राजा अपने लाव-लश्कर के साथ नगर भ्रमण पर निकले थे। चलते-चलते उनकी दृष्टि सड़क किनारे बैठे एक छोटे से बालक पर पड़ी। वह बालक मिट्टी के छोटे-छोटे पुतले बना रहा था। राजा ने देखा कि बालक एक पुतला बनाता, उसके कान में कुछ बुदबुदाता और फिर उसे तोड़कर वापस मिट्टी में मिला देता। राजा को बड़ा कौतूहल हुआ। उन्होंने अपना रथ रुकवाया और बालक के पास जाकर पूछा, "बेटा, तुम यह क्या कर रहे हो? इतनी मेहनत से खिलौना बनाते हो और फिर उसे नष्ट कर देते हो? " बालक ने बड़ी मासूमियत और गंभीरता से उत्तर दिया, "राजन, मैं इन मिट्टी के पुतलों के कान में पूछता हूँ कि क्या तुमने कभी उस परमात्मा का नाम लिया? क्या कभी 'राम' नाम जपा? जब ये कोई उत्तर नहीं देते, तो मैं इन्हें वापस मिट्टी में मिला देता हूँ क्योंकि बिना भक्ति के यह शरीर केवल मिट्टी का ढेर है।
कथा प्रसंग 1
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