कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 49 • कथा mrP0GUWQpTirH5xt594M
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राम नवमी विशेष - श्रीराम कथा महिमा अध्याय 4 1. सुरपुर वापसी और नगर का दृश्य नारायण भट्ट अपनी पुत्री को कंधे पर बिठाकर और प्रभु द्वारा दी गई स्वर्ण मुद्राओं की पोटली लेकर वापस अपने नगर 'सुरपुर' पहुँचे। जैसे ही उन्होंने नगर की सीमा में प्रवेश किया, उन्हें सब कुछ बदला हुआ सा लगा। जो लोग पहले उन्हें 'भिखारी' कहकर दुत्कारते थे, वे अब उनके चेहरे के अलौकिक तेज को देखकर स्वतः ही मार्ग छोड़ने लगे। 2. माता-पिता का हृदय परिवर्तन उधर घर में, नारायण के जाने के बाद केशव भट्ट और उनकी पत्नी (नारायण की माता) को अपनी भूल का अहसास हुआ। माता दिन-रात रोती रहती थी और उसे अपनी उन बातों पर पछतावा था कि उसने श्रीराम की कथा सुनने से मना किया था। उसे समझ आ गया था कि घर की दरिद्रता का कारण धन की कमी नहीं, बल्कि भक्ति का अभाव था।
