कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 54 • कथा hxdkRAdqKTpO7fN8go7V
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श्रीराम कथा महिमा अंतिम अध्याय 5 1. अखंड भक्ति और सेवा का जीवन नारायण भट्ट और उनका परिवार अब पूरी तरह से श्रीराम की सेवा में समर्पित हो गया था। उनके घर का वैभव लौट आया था, लेकिन अब वह वैभव 'अहंकार' के लिए नहीं, बल्कि 'परोपकार' के लिए था। नारायण भट्ट ने अपने घर के द्वार सबके लिए खोल दिए। प्रतिदिन सुबह-शाम राम संकीर्तन होता और दूर-दूर से लोग श्रीराम कथा सुनने के लिए उनके आंगन में एकत्र होते। उनकी माता, जो कभी कथा से ऊब गई थीं, अब स्वयं भक्तों के लिए प्रसाद बनातीं और बड़े चाव से कथा के एक-एक शब्द को आत्मसात करतीं। 2. केशव भट्ट का अंत समय और अंतिम शिक्षा कुछ वर्षों के बाद, वृद्ध केशव भट्ट का अंतिम समय निकट आया। उन्होंने अपने पुत्र नारायण को अपने पास बुलाया और कहा— "पुत्र!
