श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 1 : Adiparva • अध्याय 0FQ4QK2UbpPe2iq14oxk
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धर्मराज युधिष्ठिर के धर्मनिष्ठ और न्यायप्रिय शासन में इन्द्रप्रस्थ की प्रजा पूर्णिमा के शीतल चंद्रमा के समान सुख और शांति का उपभोग कर रही थी। एक दिन ग्रीष्म ऋतु की सुखद बेला में भगवान श्रीकृष्ण और महारथी अर्जुन धर्मराज युधिष्ठिर की अनुमति लेकर यमुना नदी के सुरम्य पुलिन पर जल-विहार हेतु पधारे। वहाँ दोनों सखाओं के विश्राम हेतु सुंदर उपवन और मनोहर विश्राम-भवन सुसज्जित किए गए थे। उसी समय तपे हुए स्वर्ण के समान देदीप्यमान कांति वाले एक अत्यंत विशालकाय और तेजस्वी ब्राह्मण वहाँ उपस्थित हुए। उनके सिर पर जटा-जूट था और उन्होंने वल्कल वस्त्र धारण किए हुए थे।
