Skip to main content
Verse 1 of 24
Aa
Mahabharata Part 1 : Adiparva
Mahabharata Part 1 : Adiparva
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 1 : Adiparva • अध्याय 0RAJXF8iMzcLyZmx0q1L
1 / 24

राजा जनमेजय के सर्प-सत्र की शांतिपूर्ण समाप्ति के उपरांत यज्ञशाला में साक्षात ज्ञान-मूर्ति महर्षि कृष्णद्वैपायन व्यास पधारे। राजा जनमेजय ने समस्त सभासदों और ऋत्विजों के साथ उठकर उनका भावभीना स्वागत किया और उन्हें स्वर्ण सिंहासन पर आसीन किया। जनमेजय ने हाथ जोड़कर प्रार्थना की कि वे कौरवों और पाण्डवों के समग्र इतिहास का रहस्य सुनाएँ। राजा ने पूछा कि इतने धर्मात्मा और वीर महापुरुषों में भयंकर कलह का क्या कारण था। महर्षि व्यास ने अपने मेधावी शिष्य वैशम्पायन को आज्ञा दी कि वे महाराज जनमेजय को महाभारत की पावन संहिता विस्तार से सुनाएँ।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
1 / 24