श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 1 : Adiparva • अध्याय 2WapNdd3r2mIUREhHYeY
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धर्मात्मा शेषनाग ने अपने भाइयों की कुटिलता से विरक्त होकर घोर तपस्या की और ब्रह्माजी के वरदान से संपूर्ण पृथ्वी को अपने मस्तक पर धारण कर स्थिर किया।

धर्मात्मा शेषनाग ने अपने भाइयों की कुटिलता से विरक्त होकर घोर तपस्या की और ब्रह्माजी के वरदान से संपूर्ण पृथ्वी को अपने मस्तक पर धारण कर स्थिर किया।