श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 1 : Adiparva • अध्याय 4iOVKGNjs0hkFzyrXJLC
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महाराज पाण्डु के श्राद्ध कर्म के पश्चात महर्षि व्यास हस्तिनापुर पधारे और उन्होंने माता सत्यवती को शोकाकुल देखकर एकांत में समझाया। व्यासजी ने कहा कि अब सुख का समय बीत चुका है और आने वाले दिनों में पाप, अन्याय तथा कुरुवंश का विनाशकारी संहार होगा। उन्होंने सत्यवती को योगिनी बनकर वन में तपस्या करने का परामर्श दिया ताकि वे अपने कुल का सर्वनाश अपनी आँखों से न देखें। भीष्म की अनुमति लेकर माता सत्यवती, अम्बिका और अम्बालिका वन में चली गईं और घोर तप करके परम गति को प्राप्त हुईं। उधर हस्तिनापुर में कौरव और पाण्डव राजकुमार एक साथ बड़े होने लगे।
