श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 1 : Adiparva • अध्याय 9tcb92CGuVblF6NZS9TI
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नैमिषारण्य के पावन तपोवन में कुलपति शौनक बारह वर्षों का विशाल सत्संग-सत्र कर रहे थे। उस पावन अवसर पर रोमहर्षण के पुत्र महर्षि उग्रश्रवा सौति अत्यंत विनम्र भाव से ऋषियों की सभा में पधारे। सभी तपस्वी मुनियों ने उनका सत्कार किया और उन्हें उच्च आसन पर आसीन किया। विश्राम करने के पश्चात शौनक आदि ऋषियों ने सौतिजी से पूछा कि वे कहाँ से आ रहे हैं और उन्होंने अपनी ज्ञान-यात्रा कहाँ व्यतीत की है। सौतिजी ने हाथ जोड़कर कहा कि वे राजा जनमेजय के महान सर्प-सत्र से आ रहे हैं जहाँ उन्होंने महर्षि वैशम्पायन के मुख से महाभारत की अमृतमयी कथाएँ सुनी थीं।
