कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 35 • कथा 4FxppmhIVR7jPel1hiTB
1 / 4
बहुत समय पहले, जंगलों में रत्नाकर नाम का एक क्रूर डाकू रहता था। वह राहगीरों को लूटता था और विरोध करने पर उनकी हत्या भी कर देता था। उसका पूरा परिवार उसी की लूट की कमाई पर पलता था। एक दिन रत्नाकर ने नारद मुनि को लूटने की कोशिश की। नारद जी बिल्कुल नहीं डरे और शांत भाव से बोले— "तुम यह पाप कर्म क्यों करते हो? " रत्नाकर ने गर्व से कहा— "अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए। " नारद जी ने एक गहरा सवाल पूछा— "क्या तुम्हारा परिवार, जिसके लिए तुम इतने पाप कर रहे हो, तुम्हारे इन पापों के फल में भी हिस्सेदार बनेगा?
