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पौराणिक कथाएँ 35
पौराणिक कथाएँ 35
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 35 • कथा G89uNQvphWKqoUMfU2x0
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नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तृतीय स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें 'चंद्रघंटा' कहा जाता है। माँ चंद्रघंटा का यह स्वरूप अत्यंत कल्याणकारी और शांतिदायक है, लेकिन दुष्टों के लिए वे उतनी ही संहारक भी हैं। माँ चंद्रघंटा की कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महिषासुर नामक राक्षस ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था और देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया था, तब सभी देवता त्रस्त होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश की शरण में गए।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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