कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 23 • कथा cLPJrqItGmUPWlyTYVPZ
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यह कथा उस समय की है जब सृष्टि अपने प्रारंभिक चरण में थी। काशी की पावन नगरी में चारों ओर शांति थी, लेकिन ज्ञान की खोज में जुटे ऋषियों के मन में एक व्याकुलता थी। वे ध्वनियों को समझना चाहते थे, वे भाषा को एक सूत्र में पिरोना चाहते थे। इन्हीं ऋषियों में एक महान तपस्वी थे— महर्षि पाणिनि। महर्षि पाणिनि की कठिन तपस्या पाणिनि व्याकरण और शब्दों के रहस्यों को सुलझाना चाहते थे, पर उन्हें कोई मार्ग नहीं सूझ रहा था। हारकर उन्होंने अपनी आखें बंद कीं और काशी के अधिपति, भगवान विश्वनाथ का ध्यान करना शुरू कर दिया। वर्षों बीत गए। शरीर पर दीमक ने घर बना लिया, जटाएँ बढ़ गईं, पर पाणिनि का संकल्प हिमालय जैसा अडिग था।
