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पौराणिक कथाएँ 23
पौराणिक कथाएँ 23
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 23 • कथा gTXUZHBFvtIyCIpEWLTg
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वनवास का समय था। चित्रकूट का शांत और पावन वन—जहाँ मर्यादा, संयम और धर्म के साथ श्रीराम और माता सीता जीवन व्यतीत कर रहे थे। उसी शांत वन में एक ऐसा प्रसंग घटित हुआ, जिसने युगों के लिए यह सत्य स्थापित कर दिया कि अपराध का कोई मापदंड नहीं होता—अपराध, अपराध ही होता है। एक दिन माता सीता कुटिया के बाहर विश्राम कर रही थीं। तभी देवराज इंद्र का पुत्र जयंत, अहंकारवश कौए का रूप धारण कर वहाँ आया। उसने माता सीता के चरणों में चोंच मारी। रक्त बह निकला। यह केवल शरीर पर लगा घाव नहीं था, यह नारी की मर्यादा पर किया गया आघात था। जब श्रीराम ने यह दृश्य देखा, तो उनका क्रोध व्यक्तिगत नहीं था—वह धर्म का क्रोध था। उन्होंने कोई शस्त्र नहीं उठाया। उन्होंने केवल एक तृण उठाकर ब्रह्मास्त्र का संकल्प किया। वही तृण ब्रह्मबाण बन गया और कौए के रूप में जयंत का पीछा करने लगा।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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