कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 23 • कथा m7ZMMVTpZEXbKxuIoxfA
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श्री किशोरी अली जी की पावन कथा 1. विरह की पुकार और ब्रज आगमन ये सज्जन मूल रूप से अपनी पत्नी के वियोग में व्याकुल थे। उनकी पत्नी का नाम 'किशोरी' था। अपनी प्रियतमा की मृत्यु के बाद वे सुध-बुध खो बैठे और "किशोरी! किशोरी! " पुकारते हुए ब्रज की गलियों और गहवर वन में भटकने लगे। उनके हृदय में अपनी पत्नी के प्रति जो लौकिक प्रेम था, वह अनजाने में ही दिव्य प्रेम की ओर मुड़ रहा था। 2. श्री जी की करुणा जब वे गहवर वन के सघन कुंजों में "किशोरी" नाम की रट लगा रहे थे, तब वहाँ साक्षात् श्री राधा रानी अपनी सखियों के साथ विहार कर रही थीं। श्री जी ने जब वह करुण क्रंदन सुना, तो उनका हृदय द्रवित हो उठा।
