श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 12 : Shantikparva • अध्याय 6nqRxEf05uzIMp4RHzTe
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कुरुक्षेत्र युद्ध के उपरांत महाराज युधिष्ठिर कर्ण के ज्येष्ठ भ्राता होने का रहस्य जानकर गहन शोक और आत्मग्लानि में डूब गए। गंगा तट पर देवर्षि नारद और महर्षि व्यास ने आकर शोकाकुल युधिष्ठिर को धैर्य बंधाया। युधिष्ठिर ने कर्ण के पतन और शापों का कारण जानने की प्रार्थना की।
