कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 10 • कथा 142WHrm746iwNlBO1vAW
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गाँव के छोर पर एक छोटी सी झोपड़ी में एक बूढ़ी औरत रहती थी, जिसे सब 'दादी' कहते थे। दादी बहुत गरीब थीं, लेकिन उनके चेहरे पर हमेशा एक अजीब सा सुकून रहता था। एक दिन, शहर से एक अमीर आदमी, जो बहुत तनाव में था, रास्ते से गुजर रहा था। भूख लगने पर वह दादी की झोपड़ी में गया। दादी ने उसे बड़े प्यार से बाजरे की रोटी और चटनी खिलाई। रोटी खाते समय उस आदमी ने ध्यान दिया कि दादी ने तीन रोटियाँ बनाई थीं। एक रोटी उसने खा ली, एक दादी खा रही थीं, और तीसरी रोटी उन्होंने सामने एक साफ़-सुथरे कपड़े पर सलीके से रख दी थी। आस-पास और कोई था नहीं। उस आदमी ने कौतूहलवश पूछा, "दादी, आप इतनी गरीब हैं, फिर भी एक रोटी क्यों बर्बाद कर रही हैं?
