कावेरी नदी की कहानी भारतीय पौराणिक कथाओं में बहुत ही रोचक है। यह कहानी न केवल भक्ति और समर्पण को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे एक व्यक्ति का दृढ़ संकल्प जन-कल्याण का कारण बनता है। कावेरी की उत्पत्ति की कहानी मुख्य रूप से दो भागों में बंटी हुई है: उनका 'विष्णु पुत्री' के रूप में जन्म और 'अगस्त्य मुनि' के कमंडल से नदी बनना। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मदेव की एक मानस पुत्री थी, जिनका नाम 'विशमाया' था। उन्होंने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की ताकि वे उनके चरणों की सेवा कर सकें। भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि वे अगले जन्म में 'कावेर' नाम के राजा की पुत्री के रूप में जन्म लेंगी। राजा कावेर ने संतान प्राप्ति के लिए ब्रह्मगिरि पर्वत पर तपस्या की थी। वरदान स्वरूप उन्हें वही दिव्य कन्या प्राप्त हुई, जिसका नाम 'कावेरी' रखा गया। कावेरी बचपन से ही बहुत आध्यात्मिक थीं।
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 10 • कथा 1XwXJFQCYX3n9AkxLA9X
1 / 4
