कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 10 • कथा bRciJi8R1oz0F75MYpQb
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दक्षिण भारत के वारसी नामक प्रांत में महान भक्त जोग परमानन्द जी का जन्म हुआ था। बचपन से ही उनका मन खेल-कूद के बजाय भगवान की कथा और कीर्तन में अधिक रमता था। वे कीर्तन में इतने मग्न हो जाते थे कि भूख-प्यास की सुध भी नहीं रहती थी। एक बार कथा सुनते समय जब वक्ता भगवान के अनुपम स्वरूप का वर्णन कर रहे थे, परमानन्द जी उसी रूप में खो गए। जब आँखें खुलीं, तो उन्होंने देखा कि साक्षात पीताम्बर धारी वनमाली उनके सामने खड़े हैं। परमानन्द जी के आंसुओं ने प्रभु के चरणों को पखार दिया और प्रभु ने अपनी कृपा दृष्टि से उन्हें धन्य कर दिया। दुनिया ने उन्हें "पागल" कहा, पर जिसे प्रभु के नाम का अमृत मिल जाए, उसे संसार का कीचड़ भला कैसे भाता?
