कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 8 • कथा SCXNWUIwjO8Hq3XutE4H
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राजस्थान के एक छोटे से गाँव में एक जाट परिवार रहता था। उनके घर में ठाकुर जी (भगवान कृष्ण) की एक सुंदर मूर्ति थी। कर्मा के पिता रोज सुबह उठकर ठाकुर जी को नहलाते और उन्हें बड़े प्रेम से भोग लगाते थे। कर्मा छोटी थी, पर बड़े चाव से अपने पिता को यह सब करते देखती थी। एक बार कर्मा के माता-पिता को किसी तीर्थ यात्रा पर जाना पड़ा। पिता ने जाते समय नन्ही कर्मा को समझाया, "बेटी, देख! हम जा रहे हैं, पर ठाकुर जी को अकेला मत छोड़ना। रोज सुबह उठकर उनके लिए बढ़िया भोजन बनाना और उन्हें भोग लगाना। जब ठाकुर जी खा लें, तभी तू कुछ खाना। " अगली सुबह कर्मा जल्दी उठी।
