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पौराणिक कथाएँ 8
पौराणिक कथाएँ 8
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 8 • कथा im5yOS3KxrzSYYYNHqEg
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करौली में मदन मोहन जी के मंदिर में झाड़ू लगाने का कार्य करने वाले एक भक्त थे – उनका नाम था काले खां। काले खां श्री मदन मोहन लाल जी के मंदिर में झाड़ू लगाया करते थे; यही उनकी जीविका का साधन था। मंदिर में झाड़ू लगाने का कार्य करते-करते उन्हें प्रतिदिन मदन मोहन जी के दर्शन हो जाते, और यही उनकी दिनचर्या बन गई। धीरे-धीरे उनकी यह आदत बन गई कि जब तक ठाकुर जी के दर्शन न हो जाएं, उन्हें चैन नहीं पड़ता। वह प्रतिदिन मंदिर जाते, झाड़ू लगाते। मंदिर के भीतर जाने की अनुमति तो नहीं थी, लेकिन वह पीछे सीढ़ियों के पास खड़े हो जाते। जैसे ही भीड़ इधर-उधर होती, वह बीच में से दर्शन प्राप्त कर लेते। धीरे-धीरे उनके हृदय में भक्ति स्फुरित होने लगी। अब वे मंगला आरती से लेकर रात्रि की शयन आरती तक मंदिर में ही रहते। उनकी इस दिनचर्या से उनकी पत्नी खीझने लगी थी। परिवार वाले उन्हें 'काफ़िर' कहते थे। उन्हें तरह-तरह के ताने दिए जाते – "जन्म हमारे कुल में लिया है, लेकिन खुदा को याद नहीं करता, पत्थर को पूजने चला जाता है। " लेकिन काले खां को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता था। इसके विपरीत, अब उनकी पत्नी उनसे दूर रहने लगी। अब काले खां स्वतंत्र रूप से ठाकुर जी के दर्शन करने लगे। वह कहते, "चलो, अब दोपहर को खाना खाने घर नहीं जाना पड़ेगा। घर जाओ तो चिकचिक सुननी पड़ती है – इससे अच्छा है मंदिर में ही पड़ा रहूं। " काले खां के घर कोई संतान नहीं थी। परिवार के लोग ताना मारते – "अगर खुदा को याद करता तो संतान होता। पत्थर को पूजता है – क्या वह तुझे संतान देगा?

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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