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पौराणिक कथाएँ 19
पौराणिक कथाएँ 19
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 19 • कथा Myd6fcXfXVHSWZ7urplD
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वृंदावन की पावन धरा पर एक भव्य मंदिर था, जिसे वहाँ के राजा ने बड़े प्रेम से बनवाया था। मंदिर में बाँके बिहारीजी की सेवा के लिए एक वृद्ध पुजारी नियुक्त थे। पुजारीजी के लिए बिहारीजी केवल एक प्रतिमा नहीं, बल्कि उनके सखा, उनके स्वामी और उनका सर्वस्व थे। वर्षों बीत गए, पुजारीजी की आँखों की ज्योति कम हो गई, लेकिन प्रभु के प्रति उनका प्रेम बढ़ता ही गया। एक अटूट नियम राजा का एक नियम था; वह प्रतिदिन मंदिर के लिए ताजे फूलों की सुंदर माला भेजता। पुजारीजी वह माला बिहारीजी को धारण कराते और जब शाम को राजा दर्शन के लिए आता, तो वही 'प्रसादी माला' पुजारीजी प्रभु के गले से उतारकर राजा को पहना देते। एक क्षण का मानवीय मोह एक दिन विशेष परिस्थिति के कारण राजा मंदिर नहीं आ सके। उन्होंने सेवक के हाथ माला भिजवाई और संदेश दिया कि आज वे नहीं आएँगे।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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