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पौराणिक कथाएँ 19
पौराणिक कथाएँ 19
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 19 • कथा mZgL6tEtRZb7EHeRf2tC
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उड़ीसा में माधव दास नाम के एक परम भक्त रहते थे। उनका जीवन अत्यंत सादा था—वह केवल भगवान जगन्नाथ के भजन गाते थे, ध्यान करते थे, और हर दिन पुरी मंदिर में दर्शन के लिए जाया करते थे। उन्हें संसार की किसी वस्तु से कोई मोह नहीं था; वह बस अपनी भक्ति में ही मग्न रहते थे। माधव दास जी का एक नियम था: वह किसी भी स्थिति में अपने नित्य नियम नहीं तोड़ते थे। उनका मानना था कि उनके प्रभु जगन्नाथ स्वयं उनकी देखभाल करेंगे, और उन्हें किसी मानव की सहायता की आवश्यकता नहीं है। एक बार, माधव दास जी बहुत गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। उनकी बीमारी इतनी बढ़ गई कि वह अपने बिस्तर से उठ भी नहीं सकते थे। वह अकेले रहते थे, और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। उनकी दशा बहुत दयनीय हो गई। बीमारी के कारण, वह अब मंदिर जाकर भगवान के दर्शन भी नहीं कर पाते थे। एक दिन, उनकी तबियत बहुत बिगड़ गई और वह बिस्तर पर ही मल-मूत्र त्याग देते थे। उनके पास इतनी शक्ति नहीं बची थी कि वह खुद को साफ कर सकें। माधव दास जी दर्द में थे, पर उन्होंने शिकायत नहीं की।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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