Skip to main content
Verse 1 of 23
Aa
Ramayana Part 6 : Yuddhakand
Ramayana Part 6 : Yuddhakand
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 6 : Yuddhakand • अध्याय 5weDfUGXJvcIMe3hzP1R
1 / 23
मूल श्लोक • Sacred Shloka

हनुमान जी द्वारा लंका में मचाए गए विध्वंस को देखकर राक्षसराज रावण का मस्तक लज्जा से झुक गया था। एक अकेले वानर ने त्रिकूट पर्वत पर स्थित उसकी अजेय नगरी को जलाकर भस्म कर दिया था। रावण ने अपने मुख्य मंत्रियों को एकत्र किया और अत्यंत गंभीर स्वर में मंत्रणा आरंभ की। उसने स्वीकार किया कि शत्रु अब लंका के द्वार तक आ पहुंचा है।

भावार्थ एवं कथा प्रसंग (HI)

अगाध समुद्र को पार करने के लिए प्रभु श्रीराम ने तीन दिनों तक दर्भासन पर बैठकर समुद्रदेव की आराधना की।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
1 / 23