श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 6 : Yuddhakand • अध्याय AABnD1bCpaifJZJVKwe1
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मूल श्लोक • Sacred Shloka
अशोक वाटिका में जब सीता जी बहुत दुखी थीं, तब उनकी दयालु सखी सरमा ने उन्हें सांत्वना दी। सरमा ने बताया कि रावण ने जो कटा हुआ सिर दिखाया था, वह केवल एक झूठी माया थी।
भावार्थ एवं कथा प्रसंग (HI)
मेघनाद एक जादुई यज्ञ कर रहा था ताकि उसे कोई हरा न सके।
