श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 6 : Yuddhakand • अध्याय DkzsuTrhG3JMjRYCM6kZ
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मूल श्लोक • Sacred Shloka
भगवान श्रीराम वानर सेनापतियों के साथ सुवेल पर्वत के सर्वोच्च शिखर पर आरूढ़ हुए। वहां से उन्होंने त्रिकूट पर्वत पर बसी विश्वकर्मा द्वारा निर्मित मनोहर लंकापुरी का अवलोकन किया। लंका के मुख्य गोपुर की छत पर श्वेत चंवर और विजय-छत्र से सुशोभित राक्षसराज रावण बैठा हुआ था। उसका विशाल वक्षस्थल ऐरावत के दांतों के आघात से चिह्नित था और वह रक्तचंदन से चर्चित था।
भावार्थ एवं कथा प्रसंग (HI)
पुत्र मेघनाद के वध से व्याकुल रावण अपने दिव्य रथ पर सवार होकर अंतिम निर्णायक युद्ध के लिए रणभूमि में उतरा।
