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Ramayana Part 6 : Yuddhakand
Ramayana Part 6 : Yuddhakand
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 6 : Yuddhakand • अध्याय MEo3gPlJnGfM4DxDH9Uj
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मूल श्लोक • Sacred Shloka

नागपाश के भयंकर बंधन में बंधे होने पर भी अपने स्वाभाविक आत्मबल और शारीरिक दृढ़ता के कारण भगवान श्रीराम की मूर्छा टूटी। सचेत होकर जब उन्होंने अपने प्रिय अनुज लक्ष्मण को बाणों से क्षत-विक्षत और रक्तरंजित भूमि पर अचेत पड़े देखा, तो उनका हृदय हाहाकार कर उठा। प्रभु अत्यंत आतुर होकर करुण विलाप करने लगे।

भावार्थ एवं कथा प्रसंग (HI)

चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण होने में केवल एक दिन शेष था, अतः विभीषण ने दिव्य 'पुष्पक विमान' श्रीराम की सेवा में प्रस्तुत किया।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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