श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 6 : Yuddhakand • अध्याय WgMC21AMxNdwrcQehc5T
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मूल श्लोक • Sacred Shloka
दिन ढलते ही लंका के प्राचीरों पर घोर अंधकार छा गया और दोनों सेनाओं के मध्य भयंकर रात्रि-युद्ध छिड़ गया। वानर और राक्षस अत्यंत उत्तेजित होकर एक-दूसरे पर टूट पड़े। उस गहन तमिस्रा में योद्धा एक-दूसरे का परिचय पूछ-पूछकर प्रहार कर रहे थे। स्वर्ण कवच पहने राक्षस अंधेरे में चमकती औषधियों वाले काले पहाड़ों जैसे प्रतीत हो रहे थे।
भावार्थ एवं कथा प्रसंग (HI)
रावण के वध के बाद प्रभु श्रीराम ने विभीषण को रावण का विधिवत अंतिम संस्कार करने की आज्ञा दी।
