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पौराणिक कथाएँ 27
पौराणिक कथाएँ 27
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 27 • कथा 5RPwutNl3DgZQSra3GUb
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कुंती ने श्रीकृष्ण से दुःख क्यों माँगा? महाभारत का महासंग्राम समाप्त हो चुका था। धर्म की विजय हो चुकी थी, अधर्म का अंत हो गया था। हस्तिनापुर की राजगद्दी पर युधिष्ठिर विराजमान हो चुके थे और राज्य में शांति लौट रही थी। वर्षों के वनवास, अपमान, संघर्ष और रक्तपात के बाद अब पांडवों के जीवन में स्थिरता आ रही थी। परंतु इसी शांति के बीच एक ऐसा क्षण आया, जिसने पांडवों के हृदय को फिर से व्याकुल कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका लौटने वाले थे। यह समाचार सुनते ही पांडवों के चेहरे मुरझा गए। जिनके जीवन का हर निर्णय श्रीकृष्ण की कृपा से हुआ, जिनके संकटों में श्रीकृष्ण ही सारथी बने, जिनकी हार को भी विजय में बदल दिया—आज वही उनसे दूर जाने वाले थे। पांडवों के लिए श्रीकृष्ण केवल मित्र, मार्गदर्शक या रिश्तेदार नहीं थे— वे तो उनके जीवन की आत्मा थे।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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