कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 27 • कथा RBUqoGGxXsa7KmnKjfLC
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भक्ति और विश्वास की इसी कड़ी में एक और ऐसी कहानी है, जो अहंकार और अटूट भरोसे के बीच के अंतर को साफ कर देती है। यह कहानी है दक्षिण भारत के महान संत कनक दास जी की। कनक दास जी एक निम्न जाति से संबंध रखते थे, इसलिए उन्हें उडुपी के कृष्ण मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता था। लेकिन उनकी 'हठ' और 'भक्ति' ने जो किया, वह आज भी दुनिया के लिए एक मिसाल है। कनक दास की खिड़की: जब भगवान ने पीठ फेर ली! उडुपी (कर्नाटक) के प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर में ब्राह्मणों और ऊँची जाति के लोगों का दबदबा था। कनक दास जी भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए तड़प रहे थे, लेकिन पहरेदारों ने उन्हें धक्के मारकर बाहर निकाल दिया।
