कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 27 • कथा efElZhD5Wti6wLjOfAo6
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शनिदेव और हनुमान जी की कथा 1. शनिदेव का अहंकार पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय शनिदेव को अपनी शक्ति पर बहुत अहंकार हो गया था। उन्हें लगता था कि पूरे ब्रह्मांड में ऐसा कोई नहीं है जो उनकी दृष्टि (वक्र दृष्टि) के प्रभाव से बच सके। इसी अहंकार में वे भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी के पास पहुँचे, जो उस समय शांत चित्त होकर श्री राम के ध्यान में मग्न थे। 2. शनिदेव की चुनौती शनिदेव ने हनुमान जी के ध्यान में बाधा डालते हुए कहा, "हे वानर! मैं सूर्य पुत्र शनि हूँ। मैं तुम्हारी राशि पर आने वाला हूँ, सावधान हो जाओ।
