ये कहानी वृंदावन की है। एक औरत जो कि लड्डू गोपाल की बहुत बड़ी भक्त थी। वो खूब मन से बाल गोपाल की नित्य सच्चे मन से सेवा करती थी। वो हर दिन सुबह उठकर स्नान करके कान्हा जी को स्नान कराकर उनके वस्त्र बदलती। उन्हें चंदन का तिलक लगाकर उन्हें फल,मिसरी या लड्डू जिस दिन उसके पास जो कुछ भी होता उससे उनका भोग लगाती। लल्ला को भोग लगाकर ही वो खुद कुछ खाती। फ़िर शाम में भी उनका आरती कर उन्हें भोग लगती। पूरे दिन मन में हमेशा उनका नाम लेते रहती । एक क्षण भी ऐसा नहीं होता जिसमें वो अपने कान्हा को याद नहीं करती हो। एक दिन सुबह से उसे बहुत तेज हिचकी आ रही थी और वो बंद ही नहीं हो रही थी जिसके कारण वो बहुत परेशान थी। तभी अचानक उसकी बेटी उससे मिलने आ गई और उसके वहां आते ही उसकी हिचकी ठीक हो गई। बेटी ने मां का हाल चाल पूछा तो उसकी मां ने कहा ऐसे तो सब ठीक है मेरे लड्डू गोपाल के कृपा से, लेकिन पता नहीं आज सुबह से मुझे बहुत तेज़ हिचकी आ रही थी जो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी।
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 21 • कथा O7Nk3ZCbcFY1ANhwO1tv
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