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पौराणिक कथाएँ 2
पौराणिक कथाएँ 2
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 2 • कथा 6WUmenJs6Z9UdW6bt97G
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तुलसीदास जी द्वारा रचित 'हनुमान बाहुक' की उत्पत्ति के पीछे एक बहुत ही मार्मिक और अटूट श्रद्धा की कहानी है। यह केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि शारीरिक पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए एक भक्त की पुकार है। कहा जाता है कि अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में, जब गोस्वामी तुलसीदास जी काशी (वाराणसी) में रह रहे थे, तब वे कलियुग के प्रकोप के कारण भयंकर शारीरिक व्याधि से घिर गए थे। उनके दाहिने हाथ (भुजा) में अत्यंत तीव्र दर्द और फोड़े-फुंसियां हो गई थीं। तुलसीदास जी का वह दर्द इतना बढ़ गया था कि उन्हें रात-दिन नींद नहीं आती थी।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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