कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 2 • कथा MshJ2jRwbWlmSI4M1hll
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वरुथिनी एकादशी (वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी) की पौराणिक व्रत कथा भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नाम के एक अत्यंत दानशील और तपस्वी राजा राज करते थे। वे एक धार्मिक शासक थे और अपनी प्रजा का पुत्रवत पालन करते थे। एक बार राजा मान्धाता घोर जंगल में जाकर अपनी तपस्या में लीन हो गए। वे मौन रहकर भगवान विष्णु का ध्यान कर रहे थे। उसी समय वहां एक जंगली भालू आया और उसने राजा के पैर को चबाना शुरू कर दिया। राजा अपनी तपस्या में इतने लीन थे कि उन्होंने न तो क्रोध किया और न ही अपनी जगह से हिले।
