कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 2 • कथा szbZzm4Wnw0x4uuecT8x
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रामकृष्ण और काली माँ: 'विकलता' की लंबी कथा रामकृष्ण परमहंस की भक्ति कोई साधारण पूजा नहीं थी, वह एक पागलपन (दिव्य उन्माद)था। उनके जीवन की सबसे मर्मस्पर्शी कहानी उनके 'साक्षात्कार' की है। जब रामकृष्ण के बड़े भाई की मृत्यु हुई, तो दक्षिणेश्वर मंदिर की जिम्मेदारी उन पर आ गई। वे माँ काली की प्रतिमा को केवल पत्थर की मूर्ति नहीं, बल्कि अपनी जीती-जागती माँ मानते थे। वे अक्सर मूर्ति के सामने बैठकर उनसे बातें करते: *"माँ, तू मुझे दिखती क्यों नहीं?
