Skip to main content
Part 1 of 4
Aa
पौराणिक कथाएँ 2
पौराणिक कथाएँ 2
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 2 • कथा yox21Dg3q5wCBrlGHB0T
1 / 4

एक संत बरसाना में रहते थें और हर रोज सुबह उठकर यमुना जी में स्नान करके राधा जी के दर्शन करने जाया करते थें। यह नियम हर रोज का था। जब तक राधा रानी के दर्शन नहीं कर लेते थें, तब तक जल भी ग्रहण नहीं करते थें। दर्शन करते करते तकरीबन उनकी उम्र अस्सी वर्ष की हो गई। आज सुबह उठकर रोज की तरह उठे और यमुना में स्नान किया और राधा रानी के दर्शन को चलें गए। मन्दिर के पट खुले और राधा रानी के दर्शन करने लगे। दर्शन करते करते संत के मन में भाव आया की :- "मुझे राधा रानी के दर्शन करते करते आज अस्सी वर्ष हो गए लेकिन मैंने आज तक राधा रानी को कोई भी वस्त्र नहीं चढ़ाया। लोग राधा रानी के लिए कोई नारियल लाता है, कोई चुनरिया लाता है, कोई चूड़ी लाता है, कोई बिन्दी लाता है, कोई साड़ी लाता है, कोई लहंगा चुनरिया लाता है। लेकिन मैंने तो आज तक कुछ भी नहीं चढ़ाया है। " यह विचार संत जी के मन में आया की "जब सभी मेरी राधा रानी लिए कुछ ना कुछ लाते हैं, तो मैं भी अपनी राधा रानी के लिए कुछ ना कुछ लेकर जरूर आऊंगा। लेकिन क्या लाऊं? जिससे मेरी राधा रानी खुश हो जायें ? तो संन्त जी यह सोच कर अपनी कुटिया में आ गए। सारी रात सोचते सोचते सुबह हो गई उठे उठ कर स्नान किया और आज अपनी कुटिया में ही राधा रानी के दर्शन पूजन कियें।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
1 / 4