श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 6 : Bhishmaparva • अध्याय 43tG3A5QhhlHK7Dtjhab
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हस्तिनापुर के राजमहल में राजा धृतराष्ट्र अत्यंत व्याकुल होकर बैठे थे। जब संजय ने उन्हें कुरुक्षेत्र के युद्ध की पूर्व-तैयारियों का वृत्तांत सुनाना आरंभ किया, तो धृतराष्ट्र का हृदय कांप उठा। उन्होंने पूछा कि कौरव और पांडव सेनाएँ किस प्रकार संगठित होकर रणभूमि में खड़ी थीं। संजय ने विनम्रता से प्रणाम कर दोनों सेनाओं के महारथियों और उनके व्यूहों का सजीव वर्णन आरंभ किया। कौरव पक्ष में पितामह भीष्म सेनापति के रूप में चमक रहे थे।
