श्लोक संख्या 1
Mahabharata Part 6 : Bhishmaparva • अध्याय 48XdAAgtx1MpF9gEQFnh
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महाभारत के दूसरे दिन का सूर्योदय होते ही कुरुक्षेत्र की भूमि पर शंखों और रणभेरी का तुमुल नाद गूँज उठा। पितामह भीष्म ने कौरव सेना को एक विशाल और अभेद्य व्यूह में सुसज्जित किया। पांडवों के क्रौञ्चव्यूह को भेदने के लिए द्रोणाचार्य, शकुनि, दुर्योधन और कृपाचार्य अपने-अपने दलों के साथ आगे बढ़े। कौरव वीरों ने अपने जीवन का मोह त्यागकर पांडव सेना पर भीषण धावा बोल दिया। दोनों सेनाओं के बीच रथ से रथ और हाथी से हाथी टकराने लगे।
