कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 37 • कथा icf97KiZOEYrQ5ZN1koY
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यह कहानी उस समय की है जब मेघालय की हरी-भरी वादियों में एक विशाल और क्रूर 'थ्लेन' (एक विशाल नरभक्षी सर्प/राक्षस) का आतंक था। यह थ्लेन कोई साधारण साँप नहीं था, बल्कि एक ऐसी शक्ति थी जो रूप बदल सकती थी और लोगों को अपनी माया से मोहित कर लेती थी। चेरापूंजी के पास एक गुफा में रहने वाला यह थ्लेन रास्ते से गुजरने वाले राहगीरों को अपना शिकार बनाता था।
