कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 43 • कथा Ksge8jelJOtNq8Q0OqHg
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नवरात्रि के छठे दिन माँ दुर्गा के षष्ठम स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। इन्हें 'महिषासुर मर्दिनी' भी कहा जाता है क्योंकि इन्होंने ही उस भयंकर असुर का वध किया था। माँ कात्यायनी की कथा प्राचीन काल में 'कत' नाम के एक प्रसिद्ध ऋषि थे, जिनके पुत्र ऋषि 'कात्य' हुए। उन्हीं के गोत्र में महान ऋषि कात्यायन उत्पन्न हुए। * ऋषि की तपस्या: ऋषि कात्यायन भगवती आदिशक्ति के अनन्य भक्त थे। उनकी इच्छा थी कि साक्षात देवी उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। इसके लिए उन्होंने वर्षों तक कठिन तपस्या की।
