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पौराणिक कथाएँ 43
पौराणिक कथाएँ 43
पौराणिक पावन कथा
कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 43 • कथा uEexxO819pHP3rBJ5Yeg
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एक वृद्धा थी। वह हर रविवार सुबह गोबर से घर को लीप कर शुध्द करती , स्नान करती , भगवान की पूजा करती , भगवान को भोग लगाती उसके बाद खुद भोजन करती थी। इससे उसे भगवान की कृपा प्राप्त थी। उसे किसी प्रकार का दुःख या तकलीफ नहीं थे और वह आनंदपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रही थी। उसकी पड़ोसन जिसके यहाँ से वृद्धा गोबर लाती थी उससे जलने लगी और उसने अपनी गाय को अंदर बंद कर दिया ताकि वृद्धा गोबर न ले जा सके। इस वजह से रविवार के दिन बुढ़िया अपने घर को लीप नहीं पाई । वह पूजा नहीं कर पाई , ना भोजन बना सकी , ना भगवान को भोग लगा सकी और ना ही उसने खुद भोजन किया। रात को वह भूखी ही सो गई। उसके सपने में भगवान आये और भोग ना लगाने का कारण पूछा तो उसने बताया कि गोबर नहीं मिल पाने के कारण वह भोग नहीं लगा सकी। भगवान् बोले – हे माता तुम हर रविवार पूरा घर गोबर से लीपकर भोजन बनाकर मुझे भोग लगाने के बाद भोजन करती हो , इससे मैं बहुत प्रसन्न हूँ।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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