कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 32 • कथा Up1biQXKQfGaHjYsUyHL
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श्री राधा रमण जी के प्राकट्य की कथा भक्ति मार्ग की सबसे भावुक और अद्भुत घटनाओं में से एक है। यह कहानी श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी की अटूट श्रद्धा और भगवान के अपने भक्त के प्रति प्रेम को दर्शाती है। श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी, चैतन्य महाप्रभु के परम शिष्यों (षड गोस्वामियों) में से एक थे। महाप्रभु की आज्ञा पाकर वे वृंदावन आए। एक बार वे नेपाल की गंडकी नदी के तट पर गए, जहाँ से वे 12 शालिग्राम शिलाएं लेकर आए। वे इन शिलाओं को एक कपड़े की थैली में अपने गले में लटकाकर रखते थे और उनकी अत्यंत निष्ठा से सेवा करते थे। सन 1542 की बात है, वृंदावन में नृसिंह चतुर्दशी का पर्व मनाया जा रहा था। अन्य गोस्वामियों के पास भगवान के सुंदर विग्रह (मूर्तियाँ) थे, जिन्हें वे सुंदर वस्त्र पहनाते थे, फूलों से सजाते थे और झूला झुलाते थे।
