कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 32 • कथा vgOjbmRMSwstdYaY58ZL
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जब बालक नामदेव ने भगवान को हठ करके भोजन कराया 1. पिता की अनुपस्थिति और बालक की जिम्मेदारी संत नामदेव जी के पिता 'दामाशेट' प्रतिदिन अपने आराध्य भगवान विट्ठल को दूध का भोग लगाया करते थे। एक बार उन्हें किसी जरूरी काम से गांव से बाहर जाना पड़ा। जाते समय उन्होंने अपने छोटे पुत्र नामदेव से कहा— "बेटा, मैं कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहा हूँ। तुम नियम से ठाकुर जी को दूध का भोग लगाना। याद रखना, जब तक ठाकुर जी दूध न पी लें, तुम कुछ मत खाना। " 2. मंदिर में बालक का सरल विश्वास अगले दिन सुबह, नामदेव जी ने स्नान किया, एक कटोरे में ताजा दूध लिया और मंदिर में विट्ठल जी की मूर्ति के सामने रख दिया। उन्होंने आंखें बंद कीं और प्रार्थना की— "हे विट्ठल! दूध पी लीजिए। मेरे पिता जी ने कहा है कि आप इसे पीते हैं।
