कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 40 • कथा OhQ9n2fNNalvawpTCClH
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यह कथा शिव पुराण के विद्येश्वर संहिता और अन्य पुराणों से प्रेरित है। यह दर्शाती है कि भगवान शिव और विष्णु के बीच कोई भेद नहीं है। प्रसंग: भगवान विष्णु ने एक बार अत्यंत मनमोहक 'किशोर रूप' धारण किया। कारण: शिव जी के मन में अपने आराध्य (विष्णु जी) के उस सुंदर रूप को हर दिशा से निहारने की तीव्र इच्छा जगी। परिणाम: चूँकि ब्रह्मा जी के चार मुख थे और इंद्र की हजार आँखें थीं, वे उस रूप का अधिक आनंद ले रहे थे। शिव जी की इसी अनन्य भक्ति ने उन्हें एक मुख से 'पंचमुखी' बना दिया। एक समय की बात है, वैकुंठ के स्वामी भगवान श्री हरि विष्णु ने एक अत्यंत दिव्य और चित्त को हर लेने वाला 'किशोर रूप' धारण किया।
