कथा प्रसंग 1
पौराणिक कथाएँ 40 • कथा vqPLrBgkUAbZwrP4epzC
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ईश्वर का मंगल विधान: माँ की अंतिम इच्छा (एक सत्य घटना) यह उन दिनों की बात है जब कोलकाता में विख्यात डॉक्टर सर कैलाशचंद्र बसु का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता था। उस समय उनकी माताजी गंभीर रूप से बीमार थीं। एक रात डॉ. बसु ने अनुभव किया कि माताजी की स्थिति बिगड़ती जा रही है और जीवन की लौ किसी भी क्षण बुझ सकती है। व्याकुल हृदय से कैलाश बाबू अपनी माता के सिरहाने बैठे और अत्यंत विनम्रता से पूछा, "माँ, क्या तुम्हारे मन में कोई ऐसी इच्छा है जिसे मैं पूरा कर सकूँ? " माताजी कुछ क्षण मौन रहीं, फिर धीमी आवाज में बोलीं, "बेटा! कुछ दिन पहले मैंने बम्बई (मुंबई) के ताजे अंजीर खाए थे। मन होता है कि यदि कहीं से थोड़े अंजीर मिल जाते, तो मैं तृप्त हो जाती। " डॉ. बसु के पैरों तले जमीन खिसक गई।
