श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 3 : Aranyakand • अध्याय 0jqIVjkm1CkvU8tVyhLX
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चौदह राक्षसों के मारे जाने के पश्चात शूर्पणखा पुनः विलाप करती हुई जनस्थान पहुँची। वह धूल में लोटते हुए अपने भाई खर के सामने फूट-फूटकर रोने लगी। उसके कटे हुए अंगों से रक्त सूख चुका था और उसका मुख मलिन हो गया था। खर ने उसे ढांढस बंधाते हुए पूछा कि क्या कारण है कि वह अब भी इतनी भयभीत है। उसने कहा कि उसके भेजे गए वीर कभी निष्फल नहीं होते। शूर्पणखा ने क्रोध और भय में भरकर उत्तर दिया कि राम ने उन चौदह शूरवीरों को पल भर में ही यमलोक पहुँचा दिया है।
