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Ramayana Part 3 : Aranyakand
Ramayana Part 3 : Aranyakand
16:9 Cinematic View
श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 3 : Aranyakand • अध्याय B4s5K6pD9Kz8JlEMo4HS
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सीता जी के अहिंसा संबंधी विचार सुनकर धर्मपरायण श्री राम ने उन्हें अत्यंत प्रेमपूर्वक उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि क्षत्रिय का परम धर्म संकट में पड़े निर्दोषों की रक्षा करना है। दण्डकारण्य के पवित्र ऋषि-मुनि राक्षसों के भीषण अत्याचारों से अत्यंत पीड़ित हैं। वे तपस्वी निराहार रहकर कठोर साधना करते हैं, परंतु क्रूर निशाचर उनकी साधना को नष्ट कर देते हैं। इसलिए ऋषियों को दिया गया रक्षा का वचन किसी भी परिस्थिति में तोड़ा नहीं जा सकता।

सनातन ज्ञान धारा • Timeless Spiritual Guidanceकृतान्त शास्त्र संग्रह
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