श्लोक संख्या 1
Ramayana Part 3 : Aranyakand • अध्याय BXngohs4z9rvFyDL4FQY
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सीता जी की तीखी फटकार सुनकर रावण क्रोध से तिलमिला उठा। उसने अपने दोनों हाथों पर हाथ मारकर अपनी देह को विशाल बनाना आरंभ किया। उसने संन्यासी का छद्म वेष उतार फेंका और अपने स्वाभाविक विकराल रूप में प्रकट हो गया। उसके दस भयानक मस्तक और बीस विशाल भुजाएँ प्रकट हो गईं।
